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Sunday, July 26, 2020

प्रगति के नियोजक IAS अधिकारी


        हम यहाँ भारतीय प्रशासकीय सेवा (IAS) अधिकारी की बात दोहराना चाहते है। IAS अधिकारी वो होता है जो प्रशासन को लोकनेताओ (मंत्रीगण) से जुड़े रखता है। इनको मंत्रीगण के मार्गदर्शन में साथ मिलकर काम करना होता है। ज्यादातर IAS अधिकारी अपने कार्यकाल मने अच्छे काम करते है। लेकिन हम यहाँ उन अधिकारियों की बात करना चाहते है, जिन्होंने अपने नेतृत्व (Leadership) में निडर होकर बेहतरीन बदलाव के साथ अपने अपने विभाग को एक अलग ऊंचाई पर रख दिया है। हाँ, ऐसेही अधिकारियों की देश को जरुरत होती है। बहुत बार यह अधिकारी अपनी पूरी लगन के साथ नेकीसे काम करते है और लगातार करना चाहते है। लेकिन सुना जाता है की राजकीय दबाव (Political Pressure) नामक तंत्र उन्हें बार बार परेशान कर के रूकावट पैदा करते रहता है। अधिकारी चाहें कीतना भी नेक, निडर और दूरदृष्टिवाला हो, तब भी यह राजकीय दबाव नामक तंत्र उनपर भारी ही पड़ता है। IAS अधिकारी किसी भी विभाग पर ज्यादा तर तीन साल के लिए चुने जाते है और उन्हें उन्ही तीन सालो में अपने विभाग के हित में दिल लगाकर पूरी नैतिकता के साथ काम करना होता है। लोकनेता पढ़े लिखे और समझदार हो, तो काम करना आसान होता है और लोकहित के साथ विभाग के हित पर भी गौर किया जाता है। बहुत से लोकनेता जनता की नजर में नायक बनने के चक्कर में उनकी ज्यादा अनुदानवाली योजनाओ की खातिर विभाग के आर्थिक उन्नति को अनदेखा कर क्षति पहुचाते है। अगर लोकनेता लेनदेनवाला हो तो फिर बड़े बड़े उद्योगपतियोंसे जुड़कर विभाग को मानो बेचने पे उतर आते है। इसी कुविचारों से आज ज्यादातर सरकारी विभाग नुकसान में चल रहे है और निजीकरण की ओर पहल कर रहे है। एक अच्छा IAS अधिकारी चाहें तो मंत्रीगण को अच्छेसे समझाकर विभाग को नुकसानी और डूबने से बचा सकता है, अगर मंत्रीगण थोड़ा भी नेक और समझने लायक हो तो। 

        अब हम प्रशासन के अंदर काम करने वाले राज्य सेवावोद्वारा भरे गए अधिकारियो की बात करेंगे। उदहारण के तौर पर केंद्रस्तर का कोई भी एक विभाग ले लीजिए, जैसे की रेल्वे, हवाई उड्डयन या फिर पेट्रोलियम इत्यादि। एक IAS अधिकारी विभाग का उच्चत्तम प्रमुख होता और उसे विभाग के अंदर काम करना तब आसान होता है, जब विभाग के अंदर कार्यरत अन्य राजपत्रित और अ-राजपत्रित अधिकारी कर्मचारी पूरी निष्ठां एवं लगन के साथ काम करने वाले और अपने विभाग और जनहित के प्रति एकनिष्ठ हो। लेकिन बहुत बार ऐसा पाया जाता है की कुछ आलसी, कामचोर और लेनदेन वाले अधिकारी सिरदर्द बन जाते है। उन्हें ठीक करने के चक्कर में IAS अधिकारीयों का कीमती वक्त बर्बाद होता रहता है और काम भी ठीक से नहीं हो पाता और परिणाम वश विभाग की अधोगति तथा पीछेहठ का बड़ा कारण बन जाता है। 

        ये दो बड़ी रुकावटे ज्यादातर IAS अधिकारीयों के परेशानी का कारन बन जाती है। अगर हम चाहते है की कुछ अच्छे IAS अधिकारी देश को मिले और देशहित में काम हो, तो प्रशासन में राजकीय दबाव से मुक्तता (Political Freedom in Administration) इस विषय पर सामुदायिक स्तर पर विचार मंथन करना पड़ेगा। जिससे राजनेतावो का प्रशासन से जुड़े कामो में हस्तक्षेप थोड़ा कम होकर विभाग की प्रगति सुनिश्चित की जा सके और निजीकरण पर रूकावट लग सके। साथ ही हमें राज्य सेवावोद्वारा भरे गए अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी इनके योगदान पर गंभीरता से सोचकर उनका सकारात्मक मनोबल बढाकर नए ढंग से उनका दायित्व सुनिश्चित करना पड़ेगा। आखिरकार कोई भी सरकारी एवं निम् सरकारी कामकाज कोई भी इंसान अकेले अपने दम पर नहीं कर सकता, क्योँकि एक अच्छा और एकरूप समूह ही किसी भी विभाग की प्रगति या अधोगति का कारण होता है। इसीलिये एक उच्च एवं दृढ़निश्चयी प्रशासनिक समूह को तराशकर सँजोनेवाले IAS अधिकारी ही असल में प्रगति के नियोजक कहलाते है। 

- राणी अमोल मोरे



1 comment:

  1. बहुत खूब, अच्छा विषय 👍

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