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Wednesday, October 19, 2022

अतुल्य वाद्य


बंसी पूरी खाली खाली
फिर भी बोले मधुर बोली
ना तुझमें कोई गांठ है
ना कही भाये आठ है

बिन बजाये तू ना बजती
कृष्ण के सुन्दर होठो पे सजती
सांसो की फूँक बनकर
तुझमे विराजित खुद परमेश्वर

मधुर नाद तेरी निपुणता
तू निर्गुण तू ही सगुणता
तू सिखलाती जीवन आशा
तेरी मधुरता मदहोश निशा

ईश्वर जो तुझमे घोले
संगीत बन तू सृष्टि से बोले
तेरी चतुर निरंतर भाषा
जीवन पाये नई दिशा

तेरी कठोरता भी मंजूर है
तेरे कर्म जो ईश्वर के समीप है
है बासुरी तू एक अतुल्य वाद्य है
कृष्ण संग तेरा अदभुत मिलाप है

- रानमोती / Ranmoti


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