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Thursday, September 3, 2026
यशोदायाः प्रेमब्रह्माण्डम्
Saturday, August 8, 2026
सोने के खजाने पर बैठा भिखारी
एक गाँव में एक भिखारी रहता था।
वह रोज़ एक पुराने घर के सामने बनी छोटी-सी खाली जगह पर बैठकर, अपने फटे-पुराने कपड़ों में, हाथ में कटोरा लेकर भीख माँगता था।
राहगीर उसे कुछ सिक्के दे देते, और उन्हीं थोड़े-थोड़े पैसों से वह अपना जीवन किसी तरह गुज़ारता था।
लेकिन उसे एक बात का बिल्कुल भी पता नहीं था कि जिस जगह पर वह वर्षों से बैठा था, ठीक उसी जमीन के नीचे सोने का एक विशाल खजाना दबा हुआ था।
वह हर दिन उस खजाने के ऊपर बैठकर भीख माँगता रहा, पर कभी उसे यह एहसास नहीं हुआ कि जिस दौलत की तलाश में वह दुनिया से माँग रहा है, वह तो उसके पैरों के नीचे ही दबी हुई है।
समय बीतता गया। एक दिन उस भिखारी की मृत्यु हो गई।
कुछ समय बाद लोगों ने उस पुराने घर को तोड़कर वहाँ खुदाई शुरू की। खुदाई के दौरान उन्हें जमीन के नीचे से सोने का एक विशाल खजाना मिला।
यह देखकर सब लोग आश्चर्यचकित रह गए और हँसते हुए बोले—
“कैसी विडंबना है! जिसने पूरी ज़िंदगी सोने के खजाने पर बैठकर फटे कपड़ों में भीख माँगी, उसे कभी यह पता ही नहीं चला कि असली दौलत तो उसके अपने पैरों के नीचे थी।”
सीख
हम में से बहुत-से लोग भी उस भिखारी की तरह होते हैं।
हम अपनी खुशियों, अपनी ताकत, अपनी प्रतिभा और अपने भीतर छिपे अनमोल खजाने को पहचान नहीं पाते। हम बाहर सुख और सफलता खोजते रहते हैं, जबकि हमारी सबसे बड़ी संपत्ति हमारे अपने भीतर ही होती है।
जो अपने भीतर छिपे खजाने को पहचान लेता है,
उसे दुनिया से माँगने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
-लेखिका : रानमोती / RANMOTI
Friday, July 31, 2026
Wednesday, July 17, 2024
क्या सागर, क्या किनारा।

Saturday, July 13, 2024
ईश्वर का संवाद, क्यों हम दुखी हैं |
एक दिन एक इंसान अकेले बैठकर रो रहा था। और ईश्वर को कोस रहा था।
उसने कहा, प्रभू मेरे पास बंगला, गाडी, बीबी बच्चे, दोस्त, रिश्तेदार,नौकर चाकर सब है। फिर भी मै दुखी हूँ। ऐसा क्या कारण है, जो मुझे सबकुछ होते हुए भी दुखी रखता हैं। उसकी बाते सुनकर, ईश्वर मन ही मन मुस्कुराये और उन्होंने ठान लिया की आज इसे ज्ञान का अमृत पिला ही देता हूँ।
और तभी इंन्सान ने कहा, प्रभु क्या आप मुझपर प्रसन्न हुए हो, जो मुस्कुरा रहे हो। तो प्रभु ने कहाँ प्रसन्नता ही मेरा स्वभाव है। और रही बात तुम्हारे दुःख की, तो उसका कारण भी आज मै तुम्हे बता देता हूँ। .
तुम्हारे दुःख का कारण है तुम्हारी समझ और उसमे पनपी तुम्हारी ना समझ वाली जिद्द है।
मनुष्य ने कहा प्रभू, विस्तार से कहिये। तब उसपर ईश्वर कहते है, मनुष्य को समझ और
ज्ञान न होने के कारण ओ उसी चीजो की जिद्द करता है, जिसकी उसको कोई समझ नही होती और
वो अपने जीद के कारण उसी चीज को पा लेता है। पर संभाल नही पाता ।
तुम्हे माली बनना नही आता, और बगीचे मांग लेते हो।
घर बसाना नही आता, और शहर माँग लेते हो।
प्रेम करना नहीं आता, और आत्मा माँग लेते हो।
राजा बनना नहीं आता, और सेवक माँग लेते हो।
रिश्ता बनाना नही आता, और रिश्तेदार माँग लेते हो।
दोस्ताना समझ नहीं आता, और दोस्त मांग लेते हो।
परवरीश करनी नही आती, और बच्चे माँग लेते हो।
किसीका दुःख समझ नहीं पाते, और सुख माँग लेते हो।
नारायण बन नहीं पाते, और धनलक्ष्मी माँग लेते हो।
जीवन के अर्थ से अंजान हो तुम, और एक नया जीवन माँग लेते हो।
राम के दुःख से भी लोगो को लगाव था, और रावण की सोने की लंका से घृणा।
तुम ऊपर से कितना भी जिद्दी बनकर चीजे बटोरते रहो, पर तुम्हारे अंदर जो बैठा है, उसे
तलाश राम की। इसीलिए तुम दुखी हो। मैं उन लोगो को भी वो सब दे देता हु, जो उसे संभाल नही पाते। उनकी जीद की वजह से वो मुझसे वो सब पा तो लेते है, लेकिन प् कर भी संभल नहीं पाते।
मै भी ईश्वर हूँ, ऐसे लोगो को मै ये सारी चीजे दे देता हू। और वो सब मुर्ख, इन्ही में उलझकर कर,
दुखी होते है। पर जो असली चीज है, जो जीवन का सच्चा अमृत है, वो मै उनके लिये रखता हूँ,
जो सारी चीजो के काबील हो कर भी, उन्ही चीजों को ऊपर उठाते है, जो कर्म मैंने उन्हे सोपें
है और वो अपने उसी कर्मो से अमरता पा लेते है। वो खुद एक नया जीवन बन जाते है।
Thursday, October 19, 2023
स्त्री हा गहनतेचा विषय आहे, अस्तित्वाचा विषय आहे, गंमतीचा किंवा सहज चर्चेचा नाही!
Saturday, January 28, 2023
भारत की धरोहर को समर्पित "जड़ोंतक" हिंदी कवितासंग्रह प्रकाशित
भारताच्या परंपरेला समर्पित ‘जडोंतक’ हिंदी कवितासंग्रह प्रकाशित
Friday, August 19, 2022
एक दिन की समस्या

दूर दराज़ जंगल के पार
बस्ती थी मेरी और परिवार
सुन्दर नदी पेड़ों की मुस्कान
बाढ़ का साया हरसाल तूफान
एक टुटाफूटा घर मानो छाले पड़े
जीवन पनपता उसमे जैसे वृक्ष खड़े
हर दिन नया सवेरा जीने की आस थी
एक डरावने दिन और रात की बस बात थी
माँ की सांसो को हर पल हृदय नाप रहा था
नौ महीनो से सृष्टि की चाहत में तरस रहा था
शायद वह आखरी दिन था माँ की कोख में रहने का
उसकी भी चाह थी मै बाहर आऊँ आनंद लू जीवन का
माँ तड़प रही थी दर्द से मदद मांगती किसी मर्द से
शायद वह मेरा बाप था जो व्याकुल था मेरी उम्मीद से
उस टूटीफूटी झोपडी में बारिश गंगा रूप बरस रही थी
बाढ़ और तूफान से बस वही एक सबका सहारा थी
बड़ी कठनाई संग माँ की कोख छोड़ पैदा हुआ
पहिली बार किसी अनछुये स्पर्श का एहसास हुआ
आँखे खोलू की ना खोलू समझ में ना आया
दुनिया में दिन पहला था या आखरी जान ना पाया
एक माई आकर बोलने लगी यह बचेगा नहीं
यहाँ का माहौल इसे इसकदर जचेगा नहीं
चलो ले चलो इसे अस्पताल नदी पार कही
जहा मिले इसे सुविधा डाक्टर और इलाज सही
आँखे खोलने ही वाला था पर मै घबरा गया
सोचा खोल के भी क्या करू जब वक्त निकल गया
एक दिन की दुनिया की मोहब्बत में पड़ जाऊँगा
जो पाया नहीं देखा नहीं उसे भी पल में खो जाऊँगा
इस कश्मकश में जीवन की एक घड़ी बीत गई
चाह थी रोशनाई की अंधियारे संग मिटती गई
अचानक दो चार बस्तीवाले जमा होकर पास आये
एक झोली में डाल मुझे अपने साथ ले गये
शायद उन्हें नदी पार कर मुझे ले जाना था
बाढ़ तो मानो धरती पर निरंतर झरना था
लड़खड़ाते पाँव ले गये आखिर किनारे तक
दूसरी घड़ी भी बीत गई इंतजार में तब तक
मौत मंडराती रही जिंदगी घुटने टेक रही थी
आरोग्यसेवा ठप्प थी दरबदर सन्नाटे की गंध थी
सब छाती पिट हताश हो बस्ती को कोस रहे थे
कहानी ये उन सबकी हरसाल बस सोच रहे थे
आशा निराशा में बदल गई जब तीसरी घड़ी आई
हर किसी की उम्मीदों पर मातम की परछाई
ठण्ड से रोम रोम मेरा कांप सिकुड़ रहा था
भूख के मारे पेट ज्वाला बन तड़प रहा था
रोने का मन किया सोचा इन्हे बोल दूँ
अपनी मासूम सी भूख अब खोल दूँ
फिर मन ही मन मुस्कुराया और
खुदसे ही बोला सुन ज़रा रुक
एक दिन की तो समस्या है
बस एक दिन की समस्या
-रानमोती / RANMOTI
Saturday, July 23, 2022
बुद्धि को ग्रहण या आच्छादन
Monday, July 4, 2022
प्रकाश : विज्ञान और आध्यात्म
- प्रकाश दिखने में तो एक सफ़ेद किरण जैसी है। लेकिन उसे जब किसी पारदर्शक पिरामिड से पार किया जाये तो, उसके अंदर छिपे सात रंग उजागर होकर हमें रंगीन किरण दिखने लगती है।
- प्रकाश की किरण हमेशा सीधी रेशा में भ्रमण करती है।
- प्रकाश की गति ब्रम्हांड की सबसे तेज गति है।
- प्रकाश एक तरंग है जो बिना किसी माध्यम के भी स्पेस यात्रा कर सकती है।
- अगर कोई इंसान प्रकाशमई है या बुद्धत्व को प्राप्त है, तो वो सामान्य मनुष्य को तो देखने में वो एक साधारण सा एक जिव लगेगा। लेकिन महापुरुष को समझने के लिए हमें पारदर्शक पिरामिड के दृष्टिकोण की आवश्यकता होगी तब जाकर हम उसके महानतम या प्रकाशमय गुणों को समझ सकेंगे।
- बुद्धत्व को प्राप्त इंसान हमेशा सत्य के मार्ग की सीधी राह पर चलेगा प्रकाश की तरंग जैसा।
- सिद्ध आत्मा के दिये भौतिक जीवन या शरीर में कोई भेद न देखकर वह सूक्ष्मतम शरीर की भाती सबको एक समान तरंग की तरह देखेगा और मानेगा।
- जिसने अपने बुद्धि की सारे दरवाजे खोले है, वो सबसे गतिमान होगा, क्योंकि उसे रोकने या सोचने की कोई वजह ना होगी, वो हर चीज से वाकिब हो चूका होगा।
- जहा यात्रा करने का कोई माध्यम (हवा, पानी या धातु) उपलब्ध नहीं होगा तब भी वो अपने आप को सबसे गतिमान यात्री पायेगा। विज्ञानं कीभाषा में हम उसे होलोग्राम कहते है।
Wednesday, November 24, 2021
रानमोती काव्यसंग्रह को “साहित्य भूषण” पुरस्कार
Friday, November 19, 2021
'रानमोती' काव्यसंग्रहास मराठी साहित्य मंडळाचा “साहित्य भूषण” पुरस्कार
Thursday, May 20, 2021
दिवस-रात्र कार्यरत असणारे 'प्रकाशदूत' - वीज कर्मचारी
Monday, April 19, 2021
रासायनिक खंताचा संतुलीत वापर - मूलभूत प्रश्नोत्तरे

- रासायनिक खतांच्या अतिरीक्त वापरामुळे जमीनीचा सामु (PH) यावर परिणाम होतो.
- अतीरीक्त रासायनिक खते ही पीकाकडून शोषली जात नाहीत. ती जमीनीत अवीद्राव्य स्वरुपात तशीच पडुन राहतात, पावसाच्या पाण्याबरोबर जमीनीत खोलवर त्यांचा नीचरा होतो व कठीन असा HARDPACK जमीनीमध्ये तयार होतो.
- अतीरीक्त रासायणीक खते पावसाच्या पाण्याबरोबर वाहत जाऊन जवळच्या पाणी साठ्याला दुषीत करतात.
- रासायनिक खतांच्या अति वापरामुळे कडधान्यामध्ये प्रथीनाचे प्रमाण कमी होत आहे. तसेच फळभाज्या आणि फळे हे दुषीत होऊन त्याचे परीणाम मानवी आरोग्यावर होत आहेत.
- रासायनिक खतांचा वापर हा आपल्या जमीनीच्या आरोग्यावरुन आपण ठरवू शकतो. हे जमीनीचे आरोग्य कसे तपासायचे तर यासाठी आपल्या जमीनीचे वर्षातुन १ वेळा किंवा शक्य नसल्यास किमान ३ वर्षात १ वेळा तरी माती परीक्षण नक्की करावे.
- माती परीक्षण म्हणजे शेतजमीनीतील अंतर्भूत रसायणे वा जैविकांचे विश्लेषण होय. याद्वारे शेतात कोणते पीक घ्यावे हे नक्की करता येते व कमी खर्चात उत्पादन वाढ होते. माती परीक्षणामुळे पिकांना घावयाच्या खतांची मात्रा ठरवता येते व त्यामुळे गैरवाजवी खते देण्यावर नियंत्रण देखील करता येते.
- पिके ही पोषणाला आवश्यक ती अन्नद्रव्ये जमीनीतुन घेतात. यापैकी नत्र, स्फूरद व पालाश ही अन्नद्रव्ये पिकांना जास्त प्रमाणात लागतात. त्यामुळे जमीनीमध्ये त्यांचे प्रमाण सतत कमी होत असते. पिकास लागणाऱ्या कोणत्या अन्नद्रव्यांची व किती प्रमाणात कमतरता आहे हे मातीपरीक्षणातुन कळते.
- मातीच्या नमुन्याचे प्रयोगशाळेत सामू, विद्राव्यक्षार, सेंद्रीयकर्ब, उपलब्ध नत्र, स्फुरद व पालाश यासाठी परीक्षण केले जाते.
- यावरुन जमीनीत कोणत्या अन्नद्रव्याची कमतरता आहे व जमीन पीक वाढीसाठी चांगली आहे किंवा नाही हे समजते.
- याशिवाय माती परीक्षण व पीक उत्पादन यांचे संबधावरुन पिकांना जमिनीतून किती प्रमाणात अन्नद्रव्ये द्यावयास पाहीजेत ही माहीती मिळते.
- खतांच्या माध्यामातून पिकांना नायट्रोजन (नत्र), फॅस्फरस (स्फुरद), पालाश (पोटशियम),कॅल्शियम, मॅग्नेशियम, सल्फर हे घटक, तर बोरेन, क्लोशिन, कॉपर, आयर्न, मँगनीज, झिंक आदि सुक्ष्म अन्नद्रव्य पुरवले जातात.
- जमीनीतील एकुण मुलद्रव्यापैकी उत्तम पिकवाढीसाठी एकुण १७ मुलद्रव्ये/अन्नद्रव्ये प्रामुख्याने आवश्यक आहेत.
- जमीनीतील उपलब्ध नत्र, स्फुरद, पालाश या अन्नद्रव्यांचे प्रमाण आणि पिकाची आवश्यकता पाहून खताच्या शिफारशी केल्या जातात.
|
प्रमाण |
से. कर्ब |
नत्र |
स्फूरद |
पालाश |
|
अत्यंत कमी |
०.२० पेक्षा कमी |
१४० |
७ |
१०० |
|
कमी |
०.२१-०.४० |
१४०-१८० |
८-१४ |
१०१-१५० |
|
मध्यम |
०.४१-०.६० |
१८९-४२० |
१५-२१ |
१५१-२०० |
|
थोडे जास्त |
०.६१-०.८० |
५२१-५६० |
२२-२८ |
२०१-२५० |
|
जास्त |
०.८१-०.९९ |
५६९-६०० |
२९-३५ |
२५१-३०० |
|
अत्यंत
जास्त |
१.०० पेक्षा अधिक |
७०० |
३५ |
३०० |
- माती पृथ:करण केल्यानंतर जमिनीमध्ये असलेल्या नत्राचे प्रमाण जमीनीमध्ये कमी असल्यास विविध पिकासाठी शिफारस केलेल्या खत मात्रेत २५% वाढ करावी. हेच प्रमाण जास्त असल्यास शिफारशीत, खत मात्रेत २५% घट करावी. मात्र, जमीनीमध्ये अन्नद्रव्याचे प्रमाण मध्यम असल्यास पिकाच्या शिफारशीत खत मात्रा दिलेली आहे ती तशीच द्यावी.
- याकरिता शेतामध्ये सद्या स्थितीत N, P, K चे प्रमाण माहीती असणे आवश्यक आहे.जे पिक घेणार त्याची शिफारस केलेली खताची मात्रा ठरविणे. (उदा :- कांदापीक–१००:५०:५० किलो NPK/हेक्टर)
- त्यानंतर वापरण्यात येणाऱ्या खतात NPK चे प्रमाण माहित असणे आवश्यक.
Ø नत्र
- उदा. युरियामध्ये – ४६% N (नत्र), म्हणजे १०० KG युरीयामध्ये ४६ KGN (नत्र) असते. म्हणजेच २.१७KG युरीयामध्ये १ KGN (नत्र) मिळते.
- आपल्याला जर कांदा पीकासाठी १०० KG नत्राची (N) गरज आहे तर = १०० x २.१७ = २१७ KG युरीयाचा वापर करावा लागेल.
- माती परीक्षणामध्ये N चे प्रमाण अत्यंत कमी असेल तर ५० % वाढवून, कमी असल्यास २५ % वाढवून दयावी, म्हणजेच ५४ KG युरीया आनखी वाढवावा लागेल
- याप्रमाणे जर N चे प्रमाण जमीनीमध्ये जास्त असेल तर युरीयाचे प्रमाण ५०% किंवा २५ % कमी करावे.
Ø स्फुरद
- उदा. SSP मध्ये १६% स्फुरद असते, म्हणजेच ६.२५ KG SSP मध्ये १ KG स्फुरद.
- कांदा पीकासाठी आवश्यकता ५० KGम्हणजेच ३१५ KG SSP/ हेक्टर ची गरज आहे.
Ø पालाश
- MoP मध्ये पालाशचे प्रमाण ५८% असते, म्हणजेच १.५ KG MoP मध्ये १ KG पालाश.
- कांदा पीकासाठी आवश्यकता ५० KG म्हणजेच ८५ KG MoP/हेक्टर ची गरज आहे.
- सेंद्रिय कर्ब हा जमीनीच्या सुपिकतेचा खरा आधार असल्याने तो वाढवणे गरजेचे आहे.
- महाराष्ट्रात सर्वसाधारणपणे सेंद्रिय कर्ब कमी म्हणजे ०.२० ते ०.३० टक्क्यांपर्यंत आहे.
- शाश्वत शेती उत्पादनासाठी सर्व अन्नद्रव्यांसोबत सेंद्रिय कर्बाचा समतोल राखला गेला तरच आवश्यक अन्नद्रव्ये पिकास उपलब्ध होत असतात.
- सेंद्रिय कर्ब जितके जास्त तितका जमीनीचा पोत.
- त्याकरिता पिकांचे अवशेष न जाळता त्यापासून कंपोष्ट खत निर्माण केले तर जमिनीत मोठ्या प्रमाणात सेंद्रिय कर्बाचे प्रमाण वाढवता येते.
- सल्फर (गंधक) हा NPK नंतर चौथा महत्वाचा अन्नद्रव्य घटक आहे.
- तेल वर्गीय पिकांमध्ये गंधकाचे शोषण हे स्फुरदापेक्षा जास्त असते.
- भारतीय जमिनीमध्ये गंधकाची उपलब्धता कमी असल्याने गंधकाचे महत्व अधिक वाढले आहे.
- सल्फर जिवंत पेशीमध्ये अमिनो असिड चा घटक आहे.
- क्लोरोफिल / हरीतद्रव्य निर्मितीसाठी सहाय्यक आहे.
- सल्फर (गंधक) हा पिकामध्ये तेल, एन्झाइम आणि विटामिन बनविण्यास मदत करतो.
- सल्फर हे जिप्सममध्ये १३-१४ % , बेनटोनाईट मध्ये ९० % तर पायराईट मध्ये २२ % असते.
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