Search This Blog

Wednesday, July 29, 2020

भूल जाती हूँ


क्या खूबियाँ है मुझमें जान पाती मगर
मै उससे पहले ही खुद को भूल जाती हूँ
जमाना चाहें करे लाख सितम मगर
मै समझकर नासमझ बन जाती हूँ

जोड़ती हूँ उम्रभर अतूट रिश्ते मगर
मै खुद ही चूर चूर कर बिखर जाती हूँ
बनाया है मैने खूबसूरत आशियाँ मगर
मै खुद को ही सवांरना भूल जाती हूँ

आंखो में मेरे बेहती है फिक्र मगर
मै खुद के लिये बेफिक्र हो जाती हूँ
मुझ में बसा दया का सागर मगर
मै खुद के लिये बेदर्द बन जाती हूँ

बड़ी शिद्दत से पाला मैंने सबको मगर
मै खुद को ही जतन करना भूल जाती हूँ
दूसरो के खातिर जी लेती उम्रभर मगर
मै खुद के लिये पलभर सांस ना ले पाती हूँ

कोई मिटाएगा मेरे सारे दुःख मगर
मै खुद ही हसना भूल जाती हूँ
है मेरा भी जीवन अनमोल मगर
मै उसका भी मूल्य भूल जाती हूँ

सजाती हूँ दुसरो की दास्ताँ मगर
मै खुद की ही कहानी भूल जाती हूँ
धरतीपर खुदा का वरदान हूँ मगर
मै दूसरो के लिए खुद ही मिट जाती हूँ

- राणी अमोल मोरे

1 comment:

  1. बहोत खूब
    सदीयो पुराणी यह कहानी.. अब बदलणे लगी बाते पुराणी.👍

    ReplyDelete

Your valuable comments are highly appreciated and very much useful to further improve contents in this Blog.

Recent Posts

Mumbai’s teen innovator and author Arjit More wins International Excellence Award 2026

Teen author and innovator Arjit More from Washim has been honoured with the International Excellence Award 2026 for his research-driven writ...

Most Popular Posts