ज्ञानज्योति से जग आलोकित, करुणा जिनकी शान।
अहिंसा जिनका पथ पावन, सत्य जिनकी पहचान॥
मोह-माया से दूर रहे, आत्मविजय का ध्यान।
वीतराग महावीर प्रभु, तुमको शत-शत प्रणाम॥
बारह वर्ष तपस्या करके, केवलज्ञान पाया।
समवशरण में सत्य सुनाकर, जग को मार्ग दिखाया॥
अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह का ज्ञान।
पंचव्रतों से जग को देकर, निर्मल किया विधान॥
हर आत्मा में ज्योति समान, यही दिया संदेश।
“जीवो जीवस्य जीवनम्” से, मिटे जगत का क्लेश॥
राग-द्वेष और कर्म-विकार से, जिसने पाया त्राण।
अर्हंत बने, मोक्ष-पथ दिखाया; जय महावीर भगवान॥
- रानमोती / Ranmoti

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