तू समन्दरसा खिलखिलाता है
फिर भी अनदेखा सा कही
मै तुझमे समाई हूँ पूरी
तू लापता है मुझमें कही
- रानमोती / Ranmoti
यशोदायाः प्रेमब्रह्माण्डम् नन्दस्य गेहे या माता, वात्सल्यामृतवर्षिणी। यस्याः प्रेम्णा जगत्सर्वं, कृष्णे लीनमिवाभवत्॥ मृत्तिकां भक्षितं दृष्ट...
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