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Friday, July 31, 2020

दोस्त..?


दोस्त एंटरटेनमेंट है आपके तनाव का
दोस्त एक्सपीरियंस है आपके साथ का
दोस्त डिटेक्टर है आपकी बुराई का
दोस्त पैरामीटर हे आपके बर्ताव का

दोस्त प्रेसेंटर है आपकी खूबियों का
दोस्त सिलेक्टर है आपकी पसंद का
दोस्त एक्सेलेटर है आपकी प्रगति का
दोस्त ब्रेकर है आपकी अधोगति का

दोस्त टीचर है आपके बदलाव का टी
दोस्त स्टूडेंट है आपके आचरण का
दोस्त कॉन्फिडेंस है आपके ज्ञान का
दोस्त क्रिएटर है आपके चरित्र का

दोस्त मेमोरीकार्ड है आपकी यादों का
दोस्त फ्यूचर है आपकी सोच का
दोस्त सीक्रेट है आपकी सफलता का
दोस्त एसेट है आपकी जिंदगी का

- रानमोती /Ranmoti 

प्रिय मित्र होते है !

हसानेवाले, रुलानेवाले
खिलानेवाले, पिलानेवाले
चढ़ानेवाले, उतारनेवाले
मालूम कौन होते है ?
प्रिय मित्र होते है !

दिखानेवाले, छुपानेवाले
बढ़ानेवाले, घटानेवाले
यादोंवाले, फिर्यादवाले
मालूम कौन होते है ?
प्रिय मित्र होते है !

संभालनेवाले, बिगाड़नेवाले
चलानेवाले, रुकानेवाले
जलनेवाले, जलानेवाले
मालूम कौन होते है ?
प्रिय मित्र होते है !

समझनेवाले, समझानेवाले
सिखानेवाले, सीखनेवाले
तारीफ़वाले, निंदावाले
मालूम कौन होते है ?
प्रिय मित्र होते है !

मदत करनेवाले, लेनेवाले
साथ देनेवाले, छोड़नेवाले
वक्त बनानेवाले, बिगाड़नेवाले
मालूम कौन होते है ?
प्रिय मित्र होते है !

- रानमोती / RANMOTI  

Wednesday, July 29, 2020

भूल जाती हूँ


क्या खूबियाँ है मुझमें जान पाती मगर
मै उससे पहले ही खुद को भूल जाती हूँ
जमाना चाहें करे लाख सितम मगर
मै समझकर नासमझ बन जाती हूँ

जोड़ती हूँ उम्रभर अतूट रिश्ते मगर
मै खुद ही चूर चूर कर बिखर जाती हूँ
बनाया है मैने खूबसूरत आशियाँ मगर
मै खुद को ही सवांरना भूल जाती हूँ

आंखो में मेरे बेहती है फिक्र मगर
मै खुद के लिये बेफिक्र हो जाती हूँ
मुझ में बसा दया का सागर मगर
मै खुद के लिये बेदर्द बन जाती हूँ

बड़ी शिद्दत से पाला मैंने सबको मगर
मै खुद को ही जतन करना भूल जाती हूँ
दूसरो के खातिर जी लेती उम्रभर मगर
मै खुद के लिये पलभर सांस ना ले पाती हूँ

कोई मिटाएगा मेरे सारे दुःख मगर
मै खुद ही हसना भूल जाती हूँ
है मेरा भी जीवन अनमोल मगर
मै उसका भी मूल्य भूल जाती हूँ

सजाती हूँ दुसरो की दास्ताँ मगर
मै खुद की ही कहानी भूल जाती हूँ
धरतीपर खुदा का वरदान हूँ मगर
मै दूसरो के लिए खुद ही मिट जाती हूँ

- राणी अमोल मोरे

Monday, July 27, 2020

बाई एसटी माई


बाई एसटी माई सांग कव्हा येशील
डोस्क्यावरचं गठुडं गावी कव्हा नेशील
वाट पाहत बसलो कव्हाचं फाट्यावर
आता तरी ये आम्हा गरीबाच्या वाट्यावर
बाई एसटी माई सांग कव्हा येशील

खाजगी गाड्या आता परवडायच्या नाही
तुह्याशिवाय दुसरं गाव दावायचं नाही
लय दिवसाचं खोळंबलं लेकीचं लेकरू
केव्हा भेटवशील बाई गायीला वासरू
बाई एसटी माई सांग कव्हा येशील

तालुक्याला जाऊन कागदपत्रं काढायची
पेरणीसाठी कर्जाची विनती हाय करायची
शाळाविना पोरं उगाच फिरतात संटी
आता तरी वाजू दे रोजची तुही घंटी
बाई एसटी माई सांग कव्हा येशील

कामाचे झाले वांदे थांबलेत आठवडी बाजार
रिकाम्या खिश्यासंग माणसं झाली लाचार
कानाला सवय लागली तुह्या आवाजाची
तूच हाये खरी रक्तवाहिनी आमच्या गावाची
बाई एसटी माई सांग कव्हा येशील
डोस्क्यावरचं गठुडं गावी कव्हा नेशील

- राणी अमोल मोरे



सजलं शिवार



कष्टाने तुझ्या रे सजलं शिवार
नटली धरणी झाला किती भार
हाकेला सर्जा राजा तुझ्या आज
मुके सवंगडी घाली स्वप्नाला साज
आहे रे तू माझ्या जीवाचा पोशिंदा
भरगोस धान्य पिकेल तुला यंदा

डोळ्यात तुझ्या कष्टाची ती झोप
घाई घाई उगवलं हिरवं रोप
बघताच तुला शेताच्या बांधावर
डुलु लागलं रान वाऱ्याच्या झोतावर
आहे रे तू माझ्या जीवाचा पोशिंदा
भरगोस धान्य पिकेल तुला यंदा

वाढलं पिक जणू लेकरू वयात
पाहून त्याला बाप सुखी होई मनात
राखणासाठी तुझा दिनरात पहारा
ढगाचे नयन भिजले पाहून पसारा
आहे रे तू माझ्या जीवाचा पोशिंदा
भरगोस धान्य पिकेल तुला यंदा

डोळ्यातल्या मायेने शिवार पिकलं
त्यागाच्या त्या मातेने पिवळं नेसलं
राजा तुझ्या कुळाला पोटभर घास
हाच त्या मातीचा दिनरात ध्यास
आहे रे तू माझ्या जीवाचा पोशिंदा
भरगोस धान्य पिकेल तुला यंदा

- राणी अमोल मोरे 



#सजलं शिवार गीत 

Sunday, July 26, 2020

पहिला श्वास


देवा या सुंदर धर्तीवर
मी घेतला पहिला श्वास

आनंद बहरला हृदयात
मी क्षणात विस्मरला
त्या स्वर्गातला निवास
देवा या सुंदर धर्तीवर
मी घेतला पहिला श्वास

प्रकाशले नवीन जग
उघडता नयन ते कोरे
माझ्या कोमल देहाला
स्पर्शुनी जाई गार वारे
देवा या सुंदर धर्तीवर
मी घेतला पहिला श्वास

कंठातल्या स्वरांनी
गुंजल्या चारही दिशा
प्रथम अनुभवास आली
दिवसामागची काळी निशा
देवा या सुंदर धर्तीवर
मी घेतला पहिला श्वास

भावला किती तो मज
मायेचा प्रेमळ स्पर्श
एकटेपणाचा वास संपला
पाहताच माउली झाला हर्ष
देवा या सुंदर धर्तीवर
मी घेतला पहिला श्वास

- राणी अमोल मोरे

प्रगति के नियोजक IAS अधिकारी


        हम यहाँ भारतीय प्रशासकीय सेवा (IAS) अधिकारी की बात दोहराना चाहते है। IAS अधिकारी वो होता है जो प्रशासन को लोकनेताओ (मंत्रीगण) से जुड़े रखता है। इनको मंत्रीगण के मार्गदर्शन में साथ मिलकर काम करना होता है। ज्यादातर IAS अधिकारी अपने कार्यकाल मने अच्छे काम करते है। लेकिन हम यहाँ उन अधिकारियों की बात करना चाहते है, जिन्होंने अपने नेतृत्व (Leadership) में निडर होकर बेहतरीन बदलाव के साथ अपने अपने विभाग को एक अलग ऊंचाई पर रख दिया है। हाँ, ऐसेही अधिकारियों की देश को जरुरत होती है। बहुत बार यह अधिकारी अपनी पूरी लगन के साथ नेकीसे काम करते है और लगातार करना चाहते है। लेकिन सुना जाता है की राजकीय दबाव (Political Pressure) नामक तंत्र उन्हें बार बार परेशान कर के रूकावट पैदा करते रहता है। अधिकारी चाहें कीतना भी नेक, निडर और दूरदृष्टिवाला हो, तब भी यह राजकीय दबाव नामक तंत्र उनपर भारी ही पड़ता है। IAS अधिकारी किसी भी विभाग पर ज्यादा तर तीन साल के लिए चुने जाते है और उन्हें उन्ही तीन सालो में अपने विभाग के हित में दिल लगाकर पूरी नैतिकता के साथ काम करना होता है। लोकनेता पढ़े लिखे और समझदार हो, तो काम करना आसान होता है और लोकहित के साथ विभाग के हित पर भी गौर किया जाता है। बहुत से लोकनेता जनता की नजर में नायक बनने के चक्कर में उनकी ज्यादा अनुदानवाली योजनाओ की खातिर विभाग के आर्थिक उन्नति को अनदेखा कर क्षति पहुचाते है। अगर लोकनेता लेनदेनवाला हो तो फिर बड़े बड़े उद्योगपतियोंसे जुड़कर विभाग को मानो बेचने पे उतर आते है। इसी कुविचारों से आज ज्यादातर सरकारी विभाग नुकसान में चल रहे है और निजीकरण की ओर पहल कर रहे है। एक अच्छा IAS अधिकारी चाहें तो मंत्रीगण को अच्छेसे समझाकर विभाग को नुकसानी और डूबने से बचा सकता है, अगर मंत्रीगण थोड़ा भी नेक और समझने लायक हो तो। 

        अब हम प्रशासन के अंदर काम करने वाले राज्य सेवावोद्वारा भरे गए अधिकारियो की बात करेंगे। उदहारण के तौर पर केंद्रस्तर का कोई भी एक विभाग ले लीजिए, जैसे की रेल्वे, हवाई उड्डयन या फिर पेट्रोलियम इत्यादि। एक IAS अधिकारी विभाग का उच्चत्तम प्रमुख होता और उसे विभाग के अंदर काम करना तब आसान होता है, जब विभाग के अंदर कार्यरत अन्य राजपत्रित और अ-राजपत्रित अधिकारी कर्मचारी पूरी निष्ठां एवं लगन के साथ काम करने वाले और अपने विभाग और जनहित के प्रति एकनिष्ठ हो। लेकिन बहुत बार ऐसा पाया जाता है की कुछ आलसी, कामचोर और लेनदेन वाले अधिकारी सिरदर्द बन जाते है। उन्हें ठीक करने के चक्कर में IAS अधिकारीयों का कीमती वक्त बर्बाद होता रहता है और काम भी ठीक से नहीं हो पाता और परिणाम वश विभाग की अधोगति तथा पीछेहठ का बड़ा कारण बन जाता है। 

        ये दो बड़ी रुकावटे ज्यादातर IAS अधिकारीयों के परेशानी का कारन बन जाती है। अगर हम चाहते है की कुछ अच्छे IAS अधिकारी देश को मिले और देशहित में काम हो, तो प्रशासन में राजकीय दबाव से मुक्तता (Political Freedom in Administration) इस विषय पर सामुदायिक स्तर पर विचार मंथन करना पड़ेगा। जिससे राजनेतावो का प्रशासन से जुड़े कामो में हस्तक्षेप थोड़ा कम होकर विभाग की प्रगति सुनिश्चित की जा सके और निजीकरण पर रूकावट लग सके। साथ ही हमें राज्य सेवावोद्वारा भरे गए अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी इनके योगदान पर गंभीरता से सोचकर उनका सकारात्मक मनोबल बढाकर नए ढंग से उनका दायित्व सुनिश्चित करना पड़ेगा। आखिरकार कोई भी सरकारी एवं निम् सरकारी कामकाज कोई भी इंसान अकेले अपने दम पर नहीं कर सकता, क्योँकि एक अच्छा और एकरूप समूह ही किसी भी विभाग की प्रगति या अधोगति का कारण होता है। इसीलिये एक उच्च एवं दृढ़निश्चयी प्रशासनिक समूह को तराशकर सँजोनेवाले IAS अधिकारी ही असल में प्रगति के नियोजक कहलाते है। 

- राणी अमोल मोरे



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