ये घने बादल रोते है मेरे लिये,
कोई इंसान दर्द नहीं समझता..
ये गरजकर बरसते है मेरे लिये,
न जाने क्यों ये वक्त नहीं समझता..
- रानमोती / Ranmoti
यशोदायाः प्रेमब्रह्माण्डम् नन्दस्य गेहे या माता, वात्सल्यामृतवर्षिणी। यस्याः प्रेम्णा जगत्सर्वं, कृष्णे लीनमिवाभवत्॥ मृत्तिकां भक्षितं दृष्ट...