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Monday, June 15, 2020

बाकी है..



सूरज डूबा था लेकिन
अंधेरा होना बाकी था
कुछ था उस दिशा में
जो सुकून दे रहा था
उपर बेरंग आसमा
रंग जमा रहा था
ऊँचे ऊँचे पेडोके नए नए पत्तोने
बस खिलना शुरू किया था
पन्छियो ने थोड़ा खेलकर
रास्ता घर का पकडा था
शायद उन्हे आहट थी
कूछ प्रकृती के उपहार की
हाँ वो बात थी
बारिश के पहले मोसम की

कभी कभी जीवन जुड़ जाता है
प्रकृती के कुछ रंगो से
तब हमे अनुभूती होती है
जीवन के होने की
हमे अपने जीवन से लगाव है
और हमेशा चाहते है
जीवन अमर रहे
खुशी शांती मे है
और शांती की अनुभूती
शोर के बाद होती है
प्रकृती का गीत मधुर है
अगर सूनना है तो
उससे जुड़े रहना होता है

कुछ पाने की तलाश में
हमेशा कुछ ना कुछ
खोजा जाता है
जब पास होता है
तो उसे ही ठुकराया जाता है
ये तो बस मन की
रंगिन कहानी होती है
हर जिंदगी यादों की
अनकही फिरयादों की
बस सूनवाई होती है

अगर हमें मिटना ही है
तो गुरुर किस बात का
जाना अकेले ही है
तो किसी का साथ छुटेगा
ये डर किस बात का ?
कुछ एहसास है
तो उसे मेहसुस करो
कोई लेकर आयेगा खुशिया
ये सोचकर जीवन बरबाद ना करो
जी लो जिंदगी जब तक सांस चालू है
क्या पता अब और कितनी
हिस्से मे अपने बाकी है...​​​​​​​​​​​​​​


- राणी अमोल मोरे





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