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Friday, April 18, 2025

मैं सकल शब्दमय, काली हूँ !


हे आसमां, तू और मैं, एक जैसे ही तो हैं। मुझे पसंद है तेरा चाँद, तेरा सूरज, तेरे तारे, तेरा रात का अंधेरा और दिन का उजियाला। मुझे पसंद है तेरा खुलापन, तू हर वक्त चलता रहता है, फैलता रहता है। तेरी कोई सीमा नहीं, तू बंधनों में बंधा नहीं है। तेरी विशालता मेरी आँखों में समाती नहीं, पर तूने मुझे पूरी तरह ढक लिया है। तू साया भी है, और छाया भी। जब इस धरा के, दुख देखकर, तेरी आँखें नम होती हैं, तो वे बादल बनकर, इस प्यासी ज़मीन पर बरसती हैं। तू मुक्ति है, और मैं बंधन। एक दिन, यह धरती फट जाएगी, सब कुछ इसमें समा जाएगा। ये पेड़, ये पौधे, ये इंसान, ये जानवर, सब राख बनकर उड़ जाएँगे। पर तू… तू हमेशा रहेगा। मैं, सकल शब्दमय, काली हूँ, और उसकी हुंकार के रूप में, स्वर ओम, भी हूँ। यह ब्रह्मांड, और यह स्वर, दोनों मिलकर, एक हो जाएँगे । आपस में घुल जाएँगे, मिल जाएँगे। हे आसमां, तू और मैं एक जैसे ही तो हैं। मेरी असीमता, तुझ में जुड़ जाती है। तेरे और मेरे बीच की दीवारें टूटकर जो रास्ता बनता है, वो अनदेखा है, पर है। तेरे संग जुड़ने का, यह अनोखापन, इतना प्यारा है, की जब कभी मौत डराने आ भी जाए, तो फिक्र कहाँ! क्योंकि मुझे पता है — हे आसमां, तू और मैं एक जैसे ही तो हैं।

- रानमोती / Ranmoti

Friday, February 28, 2025

चार या भिंतीत..


रानमोती प्रस्तुत "चार या भिंतीत" हे नवीन मराठी गीत प्रतीक आहे, पती पत्नीच्या सुंदर, सहज, प्रेमळ नात्याचं, आशेचं, दोघांमधील नात्याला प्रेमाच्या बंधनात घट्ट बांधून ठेवणाऱ्या भावनांना शब्दरूपी कण्ठस्वरात मुक्त करणाऱ्या संगीताचं, ऐकणाऱ्याला एक अविस्मरणीय आनंद देऊन चिरकाळ मनामध्ये स्थान निर्माण करणारं.

- रानमोती / Ranmoti

Monday, February 17, 2025

जरूरी है !


मैंने अक्सर खामोश रहना पसंद किया, पर पता चला लोग अपनी अपनी राय बनाकर बात करना शुरू कर दे, उससे पहले मेरा बात करना जरूरी है। पेड़ पर सुन्दर सुन्दर फुल खिलेते है । हरे हरे पत्ते भी साथ में अपना रंग जमाते है। लोग उन फूल पत्तों को कमजोर समझकर तोड दे, उससे पहले पेड को अपने काँटों को उगाना भी जरूरी है। मैंने अक्सर साधा जिवन व्यतीत करना पसंद किया, पर लोग छोटा सा हवा का झोका समझकर मेरी मौजुदगी को ही नजरअंदाज कर दे, उससे पहले मुझे आँधी, तुफान बनना जरूरी है। मुझे दिखावे से ना नफरत है, ना प्रेम। हमेशा मैंने अपने तरीकों से चलना पसंद किया। पर लोगों का मेरे प्रति बरताव का तरीका बदल जाये, उससे पहले मुझे भी अपने तौर तरीके आजमाना जरूरी है। जीवन में संभावनाएं, मुझे अपने कर्मो से मिली है। मै चाहू तो ठुकराऊ, मै चाहू तो अपनाऊ। पर लोग मेरी संभावनाओ को ही ठुकराये, उससे पहले, मुझे खुद एक स्वयंरचित संभावना बनना जरूरी है। 

- रानमोती / Ranmoti

Tuesday, September 3, 2024

वजूद

बूँदों की अपनी बड़ी होशियारी है,

मिट्टी में मिले तो वजूद दिखाती है,

पानी में मिले तो, ख़ुद ही मिट जाती है 


- रानमोती / Ranmoti

रिजल्ट

अगर ईश्वर जीवनभर परीक्षा लेते है,
तो मेरे ख़याल से
रिजल्ट मरने के बाद ही आता होगा..



- रानमोती / Ranmoti

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