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Saturday, January 9, 2021

शादी एक डील..!

मॅट्रिमोनी हो या शादी डॉट कॉम
प्रेजेंटेशन ही यहाँ आता है काम
बायोडेटा भरा है मोटे पैकेज से
गैलरी फुल है सेल्फी के लगेज से

लड़कियों की ख्वाइशें हो रही मोअर
लड़के दीखने लगे है खुदसे लोअर
लड़कों के नए नए हेयर स्टाईल
फिर भी रिजेक्टेड उनकी फाईल

पापाजी रहते हमेशा परेशान
बच्चों का चाहते पूरा समाधान
समाज में उनका बड़ा दिग्गज नाम
फिर भी शादी जुड़ाना नहीं आसान काम

हर लड़का चाहता अच्छी डील
लड़की के साथ पैसा भी थोड़ा मिल
दौड़ने लगते है शादी की रेस में
लड़किया देखते हुए विभिन्न भेस में

शादी की इस रंगीनवाली डील में
कोई फायदे में रहे तो कोई घाटे में
कठनाई होते हुए भी बड़ी मजेदार है
हर कोई इस डील में तैरने को तैयार है
 
- रानमोती / Ranmoti

बाज़ार.....?


बाज़ार की लाली और हरयाली
कही खरेदी तो कही बिकवाली
मौका दशहरा तो कभी दिवाली
कही नुकसान तो कही मुनाफ़ा वसूली

चढ़ता उतरता बाजार का भाव
कही खरोंच तो कही भरदे घाव
कभी धीमी तो कभी दौड़ती नाव
शांत बैठे बाज़ एकसाथ मारते ताव

नये शिकार समझते है आसान रास्ता
बाजार की चाल से ना होते हुए वास्ता
पोपट पंछियों की बातों में उलझकर
मानो निकल पड़ते है मशगूल होकर

लगाते है अपने पसीने की पूंजी
सपनों में बस मुनाफे की खोजी
कभी कभी होती सौदो की नैया पार
तो कभी कभी बाजार की पड़ती मार

कुछ लोंगो को लगे ये पैसो की दुकान
कोई ख़रीदे गाड़ी तो कोई नया मकान
किसीको मुश्किल तो किसीको लगे आसान
सतर्कता ही होगी सफलता का निशान

- रानमोती / Ranmoti

Sunday, January 3, 2021

उगवली ज्योती..!


लखलखण्या चांदण्या 
उगवली ज्योती 
दाह करुनी जीवाचा 
वाटिले ज्ञानाचे मोती 

मते नव्हती अनुकूल परी 
माता चालली निष्ठेने 
जग गाजविती चांदण्या 
आपुल्या ज्ञान प्रतिष्ठेने 

केले श्रद्धेने प्रबोधन 
घेऊन सत्याला ओठी 
ज्ञानपथ खोलण्या लेकींना 
जगली माय ती मोठी 

प्रकाशुनी हे भारतवर्ष 
मग मावळली ज्योती 
पुण्य स्मरणात मातेच्या 
बोला जय जोती ! जय क्रांती !!

Friday, January 1, 2021

ख़्वाबों का परचम


इस नए सूरज के साथ आगे बढ़ना है
अपने ख़्वाबों का परचम लहराना है
उसके केशरिया रंग में घुल जाना है
अपनी सुनहरी ज़िंदगी को तराशना है

इस नई सुबह की किरणों को अपनाना है
अपनी सोच का कोहरा फैलाना है
उसकी आग़ाज़ को समझ कर लड़ना है
अपनी ज़िंदगी को सच्चाई से संवारना है

इस दिन के दायरे में कर्मों को बिछाना है
अपने हौंसलो को और बुलंद बनाना है
उसकी सीमा में रहकर असीम होना है
अपनी ज़िंदगी को नया मुक़ाम दिलाना है

इस नए सूरज के साथ आगे बढ़ना है
अपने ख़्वाबों का परचम लहराना है
- राणी अमोल मोरे

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